परमार्थ गुरुकुल में शास्त्र पूजन के साथ नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का आह्वान
उत्तराखंड(ऋषिकेश),मंगलवार 20 अक्टूबर 2026
विजयादशमी के अवसर पर परमार्थ निकेतन में मंगलवार को परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने वेद, उपनिषद, पुराण और शास्त्रों का पूजन किया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया गया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि गुरुकुलों में शास्त्र और शस्त्र पूजन की परंपरा को केवल अनुष्ठान तक सीमित न रखकर इसे जीवन निर्माण की प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में शास्त्र जीवन को समझने, कर्तव्यों की पहचान करने और सही-गलत के बीच विवेकपूर्ण निर्णय लेने का मार्ग दिखाते हैं। शास्त्र पूजन का वास्तविक उद्देश्य ज्ञान के प्रति सम्मान, सत्य के प्रति प्रतिबद्धता और सदाचार को जीवन में अपनाना है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान से विवेक, शक्ति से सुरक्षा और शिक्षा से संस्कार विकसित होने चाहिए। भगवान श्रीराम के आदर्शों को आचरण में अपनाकर ही विजयादशमी के संदेश को सार्थक बनाया जा सकता है।