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राज्य आंदोलनकारी करेंगे आठ तारीख को सचिवालय का घेराव

 राज्य आंदोलनकारी करेंगे आठ तारीख को सचिवालय का घेराव

उत्तराखंड(देहरादून),सोमवार 6 नवंबर 2023

शहीद स्मारक में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया और 8 तारीख की तैयारी के लिए 8 तारीख को जो सचिवालय का घेराव है उसके बारे में यह प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई है इस प्रक्रिया मैं कॉन्फ्रेंस कांफ्रेंस के द्वारा हम यह बताना चाहते हैं कि 23 सालों के राज में उत्तराखंड में जो आंदोलनकारी के सपने थे उनके बारे में बिल्कुल भी सोचा नहीं गया सही मायने में आज उत्तराखंड जो सही मायने में आंदोलनकारी थे वह अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं उनके सपनों का जो राज्य था वह नहीं बना है और इसलिए मजबूर होकर हमें सड़कों पर उतरना पड़ रहा है और हमने यह तय किया है कि हम 8 तारीख को सचिवालय का घेराव करेंगे हमारी मांगे मुख्यता मुख्य मांग हमारी है कि आंदोलनकारी जो चिन्हिकरण में छूट गए हैं उनका चिन्हिकरण किया जाए आज हम यह देखते हैं कि ऐसे लोग जिनका आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था उनको भी आंदोलनकारी बना दिया गया है हमने वह भी समय देखा है जब शुरू में अखबारों में नाम होने की ही एक शर्त थी और उसके आधार पर आंदोलनकारी बनाए गए थे इस आंदोलन के अंदर कोई झोपड़ी कोई घर ऐसा नहीं था जहां से बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर नहीं उतरे और विशेषकर महिलाएं लेकिन उस समय जो आंदोलन किया था किसी पेंशन के लिए या आंदोलनकारी को चिन्हित करने के लिए नहीं किया था इसलिए किया था कि हमारा अलग राज्य बने हमारी जो यह आजादी के आंदोलन के बाद ही जो जिस तरह के उपेक्षा उत्तराखंड की हुई वह उससे विकास के नाम पर चौपट थे रोजगार नहीं था और तमाम तरह के अभावग्रस्त मतलब विकास में बहुत पिछड़ा हुआ उत्तराखंड जब आंदोलन हुआ तो नेताओं ने यही कहा कि उत्तराखंड बनेगा तोसब कुछ मिलेगा नौकरी भी मिलेगी स्वास्थ्य मिलेगा शिक्षा मिलेगी सब कुछ मिलेगा अपुन राजवालु तो तभी सबकुछ मिलनऔर बिल्कुल मासूम औरतें मासूम लोग इस आंदोलन के अंदर उतरे और यह ऐतिहासिक आंदोलन था लेकिन हम देखते हैं कि इसका नतीजा क्या हुआ आज जो जो समर्पित थे आंदोलन के प्रति वह उनको भिखारी बनाने का काम सरकार ने कर दिया आज हम पेंशन भी देखते हैं तो उसे पेंशन को जो है वह अनुदान करके दिया जाता है अगर पेंशन होती तो पेंशन पटा होता इस तरह से क्यों आप अपमानित कर रहे हैं आंदोलनकारीयो को हमारा यह कहना है कि आंदोलनकारी के चिन्हिकरण का काम जब उत्तराखंड बना था तो घर-घर जाकर सर्वे होना था यह सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए थी यह शासन प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए थी कि घर-घर जाकर उनके चिन्हिकरण किया जाता लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उसके बाद क्या हुआ कि जो एक झुनझुना पकड़ा दिया गया की पेंशन दी जाएगी यह होगा तो एक तरह से आंदोलनकारी को भिखारी बना दिया और उनको डर-डर के ठोकरे आंदोलनकारीयो ने खाई हैअभी जो आंदोलनकारी थे वह बहुत बुजुर्ग हो गए हैं सही मायने में जो आंदोलनकारी थे और जिन्होंने जो है कई लोग ऐसे हैं जो बी पड़े हैं जो अपने जरूरी कागज को संभाल के नहीं रख सकते थे जो इतने चक्कर नहीं काट सकते थे घरों में बैठे हुए हैं अभी चलेंगे ज्यादा तो चक्कर खाकर गिर जाएंगे क्योंकि उनकी उम्र भी इतने ज्यादा हो गई है और इसी तरह से आरक्षण की बात भी शायद इसीलिए आई थी कि जब वह पढ़े-लिखे नहीं थे इतना टाइम लग गया तो उन्होंने सोचा उनके बच्चों को रोजगार मिले लेकिन मुझे तो ऐसा लगता है कि उनके बच्चे भी बुजुर्ग हो गए होंगे क्योंकि सरकारी उपेक्षा के चलते ऐसा कुछ हुआ है कि उनको मिल सके और आज कोई भी आंदोलनकारी को पहचानने के लिए तैयार नहीं है चाहे वह पुलिस विभाग में हो चाहे प्रशासन में हो और चाहे सरकार में हो आपने देखा कि पिछले दिनों किस तरह एक मंत्री ने हमारे आंदोलनकारी का जो डेलिगेशन था उसको अपमानित किया तो हम यह बताना चाहते हैं सत्ताधारियों को यह बताना चाहते हैं कि जो आप ऐसो आराम कर रहे हैं जो आप ताज लगाकर बैठे हैं बहुत सारे लोग बहुत सारे मंत्री अच्छा भी काम कर रहे होंगे हम उनके लिए नहीं कर कह रहे हैं दो ही पार्टियों का राज यहां पर उत्तराखंड बनने के बाद रहा उनमें बहुत अच्छे लोग भी रहे होंगे लेकिन हम यह कहना चाहते हैं कि आप यह सब अय्याशी कुछ लोग अय्याशी कर रहे हैं ऐश कर रहे हैं भ्रष्टाचार कर रहे हैं अपने-अपने लोगों को आगे बढ़ा रहे हैं बेरोजगारों का दमन हो रहा है भू माफिया सक्रिय है रोजगार नहीं मिल रहा है इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है शिक्षा और स्वास्थ्य का हाल बहुत बुरा है तो ऐसी स्थिति में ऐसा उत्तराखंड के लिए तो हमने सपने नहीं देखे थे आज भू माफिया बहुत सक्रिय है आज बस्तियां बेदखल हो रही है क्या है यह और उनके वह जो है सरकार की छत्रछाया में पल रहे तो हम इस सबका कड़ा विरोध करते हैं और हम इसका कड़ा विरोध करते हुए यह कहना चाहते हैं कि हम मूल निवास प्रमाण पत्र हिमाचल की तर्ज पर कठोर भू कानून ताकि हमारी जमीनों को कोई हड़पे नहीं और शिक्षा स्वास्थ्य ही सब चीज की यह चीज होनी चाहिए लेकिन इसके साथ-साथ आंदोलनकारी की अपेक्षा हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे हम यह कहेंगे कि भैया एक तो आंदोलनकारी का सच सम्मान चिन्नी करण होना चाहिए समान चिन्हिकरण होना चाहिए और दूसरा क्या है कि अगर क्योंकि अभी नए लोग तो हमें पहचान नहीं रहे हैं अगर ऐसी कोई दिक्कत है तो पुराने जो एल आई यू के लोग हैं उनको इस काम पर लगाया जाए और समान रूप से देखा जाए वह कि यह होगा तो न्यायपूर्ण एक काम होगा दूसरा क्या है कि जो आंदोलनकारियों को पेंशन मिल रही है वह वह यह समझते हैं की पेंशन मिल रही है लेकिन यह तो अनुदान है कभी भी सरकार इसे पीछे खिसका सकती है उनका कोई पेंशन पटा तो नहीं मिल पाए इसलिए वह जिनको पेंशन मिल रही है उनको भी समझना चाहिए और सरकार को भी समझना चाहिए कि आप इस तरह से क्यों अपमानित कर रहे हैं आंदोलनकारी को पेंशन पटा दीजिए और जो छुटे हुए आंदोलनकारियों उनको जरूर चिन्हिकरण कीजिए आज कबर में पांव लटके आज वह आंदोलनकारी सड़कों पर नहीं आ सकते कहीं लेकिन वह फिर भी उनको मजबूत है कि वह बैठ जाएंगे और अब की जान से भी अपनी अंतिम सांसों तक हम इस लड़ाई को लड़ेंगे अपनी जान देने को तैयार है यही उनके पास है और हम यह कहना चाहते हैं कि अगर हमारी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो यह आंदोलन बहुत सशक्त आंदोलन आगे बनेगा इन्हीं शब्दों के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद
निवेदक
उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद संरक्षक नवनीत गुसाई
प्रदेश अध्यक्ष विपुल नौटियाल व जिला अध्यक्ष सुरेश कुमार वह प्रभात डेंड्रियाल तथा बी डी बोठियाल चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति देहरादून
जबर सिंह पावेल उत्तराखंड चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संगठन अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की उपाध्यक्ष ईनदू नौटियाल व शोभा थपलियाल मुन्नी खंडूरी वह मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अनंत आकाश जी वह राजेंद्र पुरोहित रामपाल देवेश्वरी रावत

Rakesh Kumar Bhatt

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