झारखंड में महाशिवरात्रि के तोरण द्वार पर बवाल, धारा 144 लागू
देशभर में महाशिवरात्रि को लेकर तैयारियां धूमधाम से हो रही है। इन सब के बीच 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक देवघर में भी महाशिवरात्रि को लेकर तैयारियां जोरों पर थी। तभी एक बखेड़ा खड़ा हो गया है। दरअसल, महाशिवरात्रि पर पूरे शहर में धारा 144 लागू कर दिया गया है। अब यह मामला पूरी तरीके से कोर्ट में पहुंच गया है। दूसरी ओर भाजपा झारखंड सरकार पर हमलावर हो गई है। सवाल यह भी है कि यहां सालों से महाशिवरात्रि के मौके पर शिव बारात निकालने की प्रथा चली आ रही है। लेकिन अगर धारा 144 लागू होता है, तो दूर-दूर से लोग इसे देखने कैसे आएंगे। शहर के कई संगठन भी इस आदेश का विरोध जता रहे हैं।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड सरकार से सवाल पूछे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि शिव बारात बाबा की नगरी में नहीं निकाली जाएगी तो कहां निकाली जाएगी। अपने बयान में निशिकांत दुबे ने कहा कि हम चाहते हैं कि शिव बारात निकले और वर्षों की परंपरा कायम रहे। उन्होंने कहा कि जब कोरोना काल में मंदिर बंद हुआ था तब मैं सर्वोच्च न्यायालय गया था और पूजा शुरू कराई थी। ये बाबा की नगरी है यहां किसी का अहंकार नहीं चलता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं ये मानता हूं कि ये हेमंत सोरेन का पतन का रास्ता है। जो भी अधिकारी उनका साथ दे रहे हैं उनके बर्बाद होने का रास्ता है।
निशिकांत दुबे ने ट्वीट कर कहा कि देवघर में शिव बारात रोकने की साज़िश व धारा 144 लागू कर दहशत पैदा करने की हिंदू विरोधी मानसिकता यहाँ छिपी हुई है। यदि उपायुक्त को अजमेर शरीफ़ की चिन्ता करनी है तो शिव बारात कैसे होगी? जय शिव। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भगवान शिव की नगरी में अगर शिव बारात नहीं निकलेगी तो और कहां निकलेगी? मक्का और वेटिकन में? वहीं, झारखंड के पलामू जिले के पनकी कस्बे में बुधवार को विभिन्न समुदायों के दो समूहों के बीच हुई झड़प में कम से कम छह लोग घायल हो गए थे। अधिकारी ने बताया कि यह झड़प पनकी बाजार में आगामी शिवरात्रि उत्सव के लिए स्थापित स्वागत द्वार को नुकसान पहुंचाने को लेकर हुए विवाद के बाद हुई।