आज है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की अष्टमी, जानें-तिथि, पूजा विधि महत्व एवं मंत्र
गुप्त नवरात्र अष्टमी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पूजा का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद माँ अष्टभुजी दुर्गा की पूजा करने के लिए आसन पर बैठें और हाथ में चावल लेकर भगवती दुर्गा का ध्यान करें. ध्यान करके माँ दुर्गा के चरणों में चावल समर्पित करें. आसन के लिए फूल चढ़ाएं. यदि मिट्टी से निर्मित दुर्गा प्रतिमा का पूजन करना हो तो पूजन पात्र का प्रयोग करना चाहिए. इसके बाद माँ दुर्गा की मूर्ति को दूध से स्नान कराएं और पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएं. इसके बाद क्रमश: दही, शुद्ध घी, शहद व शक्कर से दुर्गा प्रतिमा को स्नान करवाएं और हर बार शुद्ध जल से भी स्नान करवाएं. पंचामृत से स्नान कराकर शुद्ध जल से स्नान कराएं. इसके बाद दुर्गा प्रतिमा पर क्रमशः गंध, वस्त्र, यज्ञोपवीत समर्पित करें. इसके बाद चंदन व अन्य सुगंधित द्रव्य समर्पित करें. तत्पश्चात् पुष्पमाला, बिल्व पत्र व धूप अर्पित करना चाहिए. दीप दिखलाएँ और हाथ धो लें. माँ को नैवेद्य (भोग) लगाएं और इसके बाद फल, पान और सुपारी चढ़ाएं. दक्षिणा के रूप में कुछ धन अर्पित करें. कपूर से माँ भगवती की आरती करें व पुष्पांजलि अर्पित कर क्षमा प्रार्थना करें।
पूजा का शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 25 जून को देर रात 12 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 27 जून को देर रात 02 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि मान है। अतः आज 26 जून को दुर्गा अष्टमी है। गुप्त नवरात्रि के दौरान जगत जननी मां दुर्गा की पूजा निशिता काल में की जाती है। अतः साधक सिद्धि प्राप्ति हेतु मध्य रात्रि में देवी मां की पूजा करते हैं। सामान्य साधक स्नान-ध्यान के पश्चात मां दुर्गा की पूजा-उपासना कर सकते हैं।
आषाढ़ शुक्ल अष्टमीको त्रिपुरा में खरसी पूजा उत्सव मनाया जाता है. जिसमें अधिकतर संन्यासी ही भाग लेते हैं. तमिलनाडु में आषाढ़ मास की अष्टमी को मनाए जाने वाले महोत्सव को अदिपुरम कहा जाता है. इस दिन लोग अपने परिवार की सुख-शांति हेतु शक्ति-देवी की पूजा करते हैं. आषाढ़ शुक्ल नवमी गुप्त नवरात्र का अंतिम दिन होता है. उस दिन भारत के कश्मीर के भवानी मंदिर में विशाल मेला लगता है. उसी दिन हरि जयंती के कारण वैष्णव भक्त व्रत भी रखते हैं और वैष्णव मंदिरों में मनोकामनाओं की पूर्ति और दर्शनार्थ जाते हैं. इस दिन व्रत कर माता की पूजा करने से परिवार में शारीरिक से पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है. परिवार में शरीर कष्ट पर होने वाले व्यय से राहत मिलती है.