देहरादून की पहचान थी हरयाली,बासमती चावल और शान्ति जो अब खो गई है - कुलदीप सिंह ललकार - Shaurya Mail

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देहरादून की पहचान थी हरयाली,बासमती चावल और शान्ति जो अब खो गई है – कुलदीप सिंह ललकार

 देहरादून की पहचान थी हरयाली,बासमती चावल और शान्ति जो अब खो गई है – कुलदीप सिंह ललकार

उत्तराखंड(देहरादून),रविवार 23 जून 2024

इक समय ऐसा था की देहरादून सिटी आपनी हरयाली, बासमती चावल और शान्ति के लिये जाना जाता था परन्तु ये अजीब विद्वाबना है की आज उसी देहरादून में वृक्षारोपण को लेकर आज सडको में उतर कर सरकार से रोड चोढ़ी करण के नाम पर हजारों वृक्षों को बचाने की अपील कर रहे है इक तरफ सिटी को स्मार्ट बनाने के नाम पर पर्यावरण को कुर्बान करना समझ से पड़े है वृक्ष ना केवल जीवन देतें है वहीँ फल व अमूल्य लकड़ी भी देतें है और ये वन सम्पदा में अमूल्य बूटीया भी मिलती है इनका सरक्षण करना प्रतेक नागरिक का कर्तव्य है राष्ट्र वादी आर टी आई एक्टिविस्ट एंड ह्यूमन राइट्स फेडरेसन भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप सिंह ललकार ने कहाँ वृक्षों को बचाने की मुहीम में उनका संगठन इसका समर्थन एवम स्वागत करता है वहीँ राष्ट्रीय माह मंत्री वेद गुप्ता ने कहाँ की वृक्षों का पूजन करना हमारी संस्कृति और पहचान था परन्तु कब हम आपनी संस्कृति को भूल कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने लगे आखिर हम क्यों भूल जाते है वृक्ष ना केवल प्राण वायु देतें है अपितु हमें छाया भी देतें है वहीँ प्रदेश अध्यक्ष राकेश कुमार भट्ट ने कहाँ की अगर हर नागरिक आपनी जिम्मेदारी निभा कर वृक्षारोपण कर पर्यावरण का सरक्षण करें तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है वहीँ प्रदेश माह मंत्री राकेश शर्मा ने वृक्षारोपण के कार्यक्रम को पूरे उत्तराखंड में जन आंदोलन बना कर वृक्षों को बचाने का अहवान किया ये बैठक चखुवाला में आयोजित की गई इस अवसर में अरविन्द मल्होत्रा, एडवोकेट मनीष, अमित वर्मा, कृष्ण गोपाल रुहेला, दीपक गुसाईं, कैलाश सेमवाल, बिजेंद्र सेमवाल, हेमंत शर्मा, राजकुमार, राजेश नाथ, शिवम् भट्ट, वैभव पंत, गौरव नौटियाल, अभिषेक राघव आदि मौजूद थे।

Rakesh Kumar Bhatt

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