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सफल रही ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर की दूसरी उड़ान

 सफल रही ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर की दूसरी उड़ान

नई दिल्ली,शुक्रवार 15 दिसंबर 2023

ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर की दूसरी उड़ान पूरी तरह सफल रही है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने यह अभ्यास शुक्रवार को कर्नाटक के चित्रदुर्ग स्थित वैमानिकी परीक्षण रेंज में किया। मानव रहित लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में यह बड़ी सफलता मानी जा रही है। इस हवाई वाहन को बेंगलुरु स्थित डीआरडीओ की प्रमुख अनुसंधान प्रयोगशाला वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान ने डिजाइन और विकसित किया है।

डीआरडीओ अधिकारियों ने बताया कि ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर का पहला उड़ान परीक्षण 01 जुलाई, 2022 को किया गया था। दूसरे उड़ान परीक्षण में यूएवी ने सफल उड़ान का प्रदर्शन किया, जिसमें टेक-ऑफ, वे पॉइंट नेविगेशन और एक आसान टचडाउन शामिल है। यूएवी के एयरफ्रेम, अंडरकैरिज और विमान के लिए उपयोग किए जाने वाले संपूर्ण उड़ान नियंत्रण और एवियोनिक्स सिस्टम स्वदेशी रूप से विकसित किए गए हैं। यह यूएवी एक छोटे, टर्बोफैन इंजन से संचालित है। यह उड़ान भविष्य के मानव रहित विमानों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को साबित करने के मामले में एक प्रमुख मील का पत्थर है। साथ ही ऐसी सामरिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

टेललेस कॉन्फ़िगरेशन में इस उड़ान के साथ भारत उन देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है, जिन्होंने फ्लाइंग विंग कॉन्फ़िगरेशन के नियंत्रण में महारत हासिल की है। इस यूएवी को डीआरडीओ के वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (एडीई) ने डिजाइन और विकसित किया है। इस विमान की पहली उड़ान जुलाई, 2022 में होने के बाद दो इन-हाउस निर्मित प्रोटोटाइप का उपयोग करके विभिन्न विकासात्मक विन्यासों में छह उड़ान परीक्षण किए गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चित्रदुर्ग एटीआर से ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर की सफल उड़ान पर डीआरडीओ को बधाई दी है।

Rakesh Kumar Bhatt

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