एनडीएमए के समक्ष दिया जायेगा अतिवृष्टि रोकने का प्रस्तुतिकरण - Shaurya Mail

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एनडीएमए के समक्ष दिया जायेगा अतिवृष्टि रोकने का प्रस्तुतिकरण

 एनडीएमए के समक्ष दिया जायेगा अतिवृष्टि रोकने का प्रस्तुतिकरण

एनडीएमए के समक्ष दिया जायेगा अतिवृष्टि रोकने का प्रस्तुतिकरण

 

-भारत सरकार के रेखीय विभाग को भी किया जायेगा शामिल

-विभागीय मंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति की रिपोर्ट का अवलोकन

 

देहरादून,  सूबे में अतिवृष्टि एवं वनाग्नि की रोकथाम के लिए मैग्नेटिक टैक्नोलॉजी-एल.एल.सी. कंपनी द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्ताव एवं तथ्यों का तकनीकी अध्ययन एवं मूल्यांकन करने हेतु गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करा दी है। समिति के सुझाव पर कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा मैग्नेटिक टैक्नोलॉजी का प्रस्तुतिकरण दिया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) एवं भारत सरकार के रेखीय विभागों के समक्ष भी इस तकनीकी के प्रदर्शित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की उपस्थिति में आज सचिवालय स्थित डीएमएमसी सभागार में मैग्नेटिक टैक्नोलॉजी-एल.एल.सी. कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा अतिवृष्टि एवं वनाग्नि की रोकथाम हेतु विशेष तकनीकी का प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस अवसर पर कंपनी द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्ताव एवं तथ्यों का तकनीकी अध्ययन एवं मूल्यांकन करने हेतु गठित राज्य स्तरीय समिति के सदस्य भी मौजूद रहे। डॉ. रावत ने बताया कि मैग्नेटिक टैक्नोलॉजी के प्रतिनिधि ने बादल फटने की घटना एवं वनाग्नि को रोकने हेतु प्रयुक्त मैग्नेटिक टैक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया। जिसमें बादलों को जनरेट करना एवं अतिवृष्टि की संभावना को देखते हुए बादलों को अन्यत्र शिफ्ट किये जाने की तकनीकी शामिल है। विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को इस तकनीकी का प्रस्तुतिकरण राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भारत सरकार एवं रेखीय विभागों के समक्ष देने के निर्देश दिये। ताकि एनडीएमए भारत सरकार सहित अन्य रेखीय विभाग मैग्नेटिक तकनीकी से अतिवृष्टि रोकने एवं बादलों के सजृन करने की तकनीक के क्रियान्वयन हेतु सहयोग प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस तकनीकी के विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन के साथ-साथ भौतिक अध्ययन भी किया जायेगा। जिसके उपरांत ही इस तकनीकी का इस्तेमाल राज्य में किया जायेगा। डॉ. रावत ने कहा कि अगर तकनीकी सभी मानकों पर खरी उतरी तो यह तकनीकी सूबे में न सिर्फ अतिवृष्टि एवं वानाग्नि की रोकथाम हेतु उपयोगी होगी बल्कि केदारनाथ तथा गौला नदी क्षेत्र में आई भयावाह आपदाओं को रोकने में भी कारगर साबित होगी। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग एस. ए. मुरुगेशन, मुख्य वन संरक्षक (फायर एंड डिजास्टर) पी. के. पात्रो, निदेशक मौसम विभाग केंद्र देहरादून विक्रम सिंह, निदेशक यू-सैक डॉ. एम. पी.एस. बिष्ट, प्रभारी अधिशासी निदेशक यूएसडीएमए राहुल जुगराण, प्लानर यूएसडीएमए डॉ पूजा राणा, मैग्नेटिक टेक्नोलॉजी के प्रतिनिधि राघवेंद्र एवं सोबित सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

Rakesh Kumar Bhatt

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