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दीपावली में गर्भवती माताएं कैसे मनाएं दीपावली, क्या सावधानी बरतें

 दीपावली में गर्भवती माताएं कैसे मनाएं दीपावली, क्या सावधानी बरतें

उत्तराखंड(देहरादून),शनिवार 11 नवंबर 2023

दीपावली आ गई है। पांच दिन त्योहारों की इस परंपरा में गर्भवती माताओं को विशेष सतर्कता बरतनी होती है। जिनके बारे में आपने पहले कभी नहीं सोचा होगा जैसे पटाखों से होने वाले प्रदूषण का आप पर और आपके बढ़ते शिशु पर क्या प्रभाव होगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप त्योहारों का आनंद नहीं ले सकती हैं।

जानिए आप कैसे त्योहार को खुश-नुमा बना सकती है? इन बातों को डॉ. सुजाता संजय से समझिए। उन्होंने बताया कि पटाखों से निकलने वाला धुआं, धमाके की आवाज और कठोर रसायन गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होते हैं। साथ ही ये भ्रूण को भी नुकसान पहुंचाते है। दीपावली के दिन अगर आपके घर में कोई महिला गर्भवती है या फिर आप खुद गर्भवती हैं ंतो आपको अपना खास ख्याल रखना चाहिए, जिससे उन्हें या फिर उनके पेट में पल रहे शिशु को कोई तकलीफ ना हो।

संजय ऑर्थोपीड़िक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर की राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता संजय ने बताया कि दिवाली के जश्न के दौरान छोटी-सी भी लापरवाही गर्भवती महिलाओं को जोखिम में डाल सकती है।

शनिवार को दीपावली के संदर्भ में अपने चिकित्सा केंद्र पर बातचीत में डॉ. संजाता संजय सिंह ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को पटाखों से फैले प्रदूषण से भी बच कर रहना चाहिए गर्भावस्था के दौरान प्रदूषण गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है। पटाखों से निकलने वाले धुऐं में काफी अधिक मात्रा मेें कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रिस ऑक्साइड होता है। ऐसे में इन रसायनों के सीधे संपर्क में आने से गर्भ में पल रहे बच्चे और मां दोनों को खतरा हो सकता है। यह हानिकारक गैस भ्रूण के प्लेसेंटा से हो कर गुजरे तो गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। यह भ्रूण के विकास में रूकावट का कारण भी बन सकता है।

डॉ. सुजाता संजय यह भी कहती है कि जिन्हें सांस की समस्या हो, उन्हें निश्चय ही प्रदूषण से दूर रहना चाहिए। खासकर यदि किसी महिला को अस्थमा की समस्या है तो उन्हें हर वक्त अपने साथ इन्हेलर रखना चाहिए। एलर्जी के खतरे को कम करने के लिए जब तक संभव हो सजावट की फूल-मालाएं आदि को घर से बाहर ही रखें। गर्भवती माताओं को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में 1 से 2 घंटे के अंतराल पर पौष्टिक भोजन ग्रहण करना चाहिए और संभव हो तो हर घंटे में पानी पीते रहना चाहिए। ऐसा करने से चक्कर आने की समस्या, बेहोशी और सुस्ती से आप खुद को बचा सकती है। हो सकें तो तेल और मसाले वाला भोजन ना खाएं साथ ही मिठाई भी कम ही खाएं।

डॉ. सुजाता संजय ने गर्भवती महिलाओं से कहा है, कि घर का काम करते हुए गर्भवती महिलाओं को सचेत रहना चाहिए। घर की सफाई करते वक्त आपको स्टूल पर नहीं खड़े होना है ।

Rakesh Kumar Bhatt

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