Navratri 2026 : 11 से 20 अक्टूबर तक नवरात्रि, जानें 9 दिनों में किस देवी की होगी पूजा और क्या है हर स्वरूप का महत्व - Shaurya Mail

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Navratri 2026 : 11 से 20 अक्टूबर तक नवरात्रि, जानें 9 दिनों में किस देवी की होगी पूजा और क्या है हर स्वरूप का महत्व

 Navratri 2026 : 11 से 20 अक्टूबर तक नवरात्रि, जानें 9 दिनों में किस देवी की होगी पूजा और क्या है हर स्वरूप का महत्व

शनिवार 10 अक्टूबर 2026

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि पर्व की शुरूआत होती है। इस साल 11 अक्तूबर से शुरू होकर 20 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। इन नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती हैं। बता दें कि माता के हर स्वरूप का अपना एक विशेष महत्व और आशीर्वाद है। अगर आप भी मां के हर स्वरूप का अर्थ और संदेश के बारे में जानना चाहती हैं, तो नीचे लेख में न्यूम्रोवाणी के ज्योतिषाचार्य सिद्धार्थ एस कुमार से जानें कि नवरात्रि के नौ दिनों में किस दिन किस देवी की पूजा होती है और उनके आशीर्वाद से हमारे जीवन में क्या बदलाव आ सकते हैं?

मां दुर्गा के 9 स्वरूपों का अर्थ

नवरात्रि सिर्फ नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन के नौ महत्वपूर्ण गुणों को समझने और उन्हें अपने व्यवहार में ढालने का अवसर भी है। मां दुर्गा के नौ स्वरूप जीवन के अलग-अलग पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो हमें स्थिरता, अनुशासन, साहस और आंतरिक शांति का संदेश देते हैं।

पहला दिन : मां शैलपुत्री-स्थिरता और नई शुरुआत का प्रतीक

शैलपुत्री का अर्थ है पर्वतराज हिमालय की पुत्री, जो मां पार्वती का ही स्वरूप हैं। पर्वत की तरह अडिग रहना, जीवन की हर परिस्थिति में स्थिर रहना और अपनी मजबूत नींव तैयार करना इस स्वरूप का मुख्य संदेश है। इनकी उपासना से मानसिक स्थिरता, आत्मविश्वास, पारिवारिक सुख और जीवन में नई शुरुआत करने की शक्ति मिलती है। यह हमें सिखाती है कि किसी भी बड़ी उपलब्धि की शुरुआत एक मजबूत आधार से होती है।

दूसरा दिन : मां ब्रह्मचारिणी-तपस्या और संकल्पशक्ति का प्रतीक

ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप और ब्रह्मचर्य का आचरण करने वाली देवी। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या की थी। यह स्वरूप अनुशासन, धैर्य और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित रहने का प्रतीक है। इनसे इच्छाशक्ति, एकाग्रता और कठिन परिस्थितियों में अपने संकल्प पर टिके रहने की शक्ति प्राप्त होती है। विद्यार्थी और अपने लक्ष्य के लिए प्रयासरत लोग इस स्वरूप से विशेष प्रेरणा लेते हैं।

तीसरा दिन : मां चंद्रघंटा-साहस और निर्भयता का प्रतीक

इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिससे इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। इनका स्वरूप सौम्यता और वीरता का अनूठा संगम है। यह हमें यह सिखाता है कि शांत रहना और जरूरत पड़ने पर अन्याय का डटकर मुकाबला करना, दोनों ही बहुत जरूरी हैं। इनकी आराधना से साहस, भय से मुक्ति और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

चौथा दिन : मां कूष्मांडा-सृजन और जीवनशक्ति का प्रतीक

धार्मिक परंपराओं में इन्हें अपनी हल्की सी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी माना गया है। इनका स्वरूप सृजन, प्रकाश और जीवन की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। यह हमें याद दिलाती है कि छोटी-सी सकारात्मक शुरुआत भी बड़े बदलाव का आधार बन सकती है। इनकी कृपा से उत्तम स्वास्थ्य, ऊर्जा, उत्साह, रचनात्मकता और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पांचवां दिन : मां स्कंदमाता- मातृत्व और संरक्षण का प्रतीक

स्कंदमाता का अर्थ है भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता। यह रूप मातृत्व, करुणा, पालन-पोषण और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है। मां स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि असली ताकत केवल खुद आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि अपनों को भी आगे बढ़ाने में है। इनकी पूजा से संतान की सुख-समृद्धि, परिवार की सुरक्षा और रिश्तों में प्यार तथा आपसी सौहार्द बढ़ता है।

छठा दिन : मां कात्यायनी-न्याय और निर्णयशक्ति का प्रतीक

ऋषि कात्यायन से जुड़ी होने के कारण इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। महिषासुर का वध करने वाली देवी का यह स्वरूप साहस, न्याय, आत्मसम्मान और सही समय पर कड़े फैसले लेने का प्रतीक है। इनकी उपासना से जीवन की रुकावटें दूर होती हैं, उचित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।

सातवां दिन : मां कालरात्रि–भय और नकारात्मकता पर विजय का प्रतीक

मां कालरात्रि देवी दुर्गा का सबसे उग्र स्वरूप हैं। अंधकार और बुरी ताकतों का नाश करने वाली यह देवी भक्तों के लिए हमेशा शुभ फल देने वाली यानी शुभंकरी मानी जाती हैं। इनकी उपासना हमें अपने भीतर के डर, असुरक्षा और कमजोरियों का डटकर सामना करने की प्रेरणा देती है, जिससे संकट और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।

आठवां दिन : मां महागौरी–शुद्धता और आंतरिक शांति का प्रतीक

महागौरी का अर्थ है अत्यंत गौर और उज्ज्वल स्वरूप वाली देवी। यह पवित्रता, निर्मलता और आत्मिक शांति का प्रतीक हैं। इनका स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों से गुजरने के बाद भी इंसान अपने भीतर शांति और सकारात्मकता बनाए रख सकता है। इनकी आराधना से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और मन की शुद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

नौवां दिन : मां सिद्धिदात्री आध्यात्मिक पूर्णता का प्रतीक

सिद्धिदात्री का अर्थ है सभी प्रकार की सिद्धियां और ज्ञान प्रदान करने वाली देवी। इन्हें सभी प्रमुख सिद्धियों की दात्री माना गया है। यह स्वरूप ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और साधना की पूर्णता का प्रतीक है। इनकी पूजा से विवेक, आध्यात्मिक तरक्की और जीवन के उच्च उद्देश्य को समझने की शक्ति मिलती है, जो यह सिखाती है कि वास्तविक सफलता स्वयं को समझने में ही है।

Rakesh Kumar Bhatt

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