नाना पाटेकर के निधन से गहरा आघात: “जाना सभी ने है, लेकिन छाप क्या छोड़ गये, यही महत्वपूर्ण है”: प्रदीप कुकरेती
उत्तराखंड(देहरादून),गुरुवार 08 अक्टूबर 2026
आज सुबह दुःखद समाचार मिला और देखा तों बहुत धक्का लगा। प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा कि बहुत फिल्म कलाकारों का देहान्त होता हैं तों निश्चित बहुत दुःख पहुंचता हैं। लेकिन *राजकपूर साहब और लता मंगेशकर जी के बाद आज नाना पाटेकर के जाने का बहुत गहरा धक्का* लगा कारण एक वास्तविक संघर्षशील व्यक्तित्व और जमीनी व्यक्तित्व। जाना सभी ने हैं लेकिन छाप क्या छोड़ गये ये महत्वपूर्ण हैं।
दुःखद मेरे पसंदीदा बेहतरीन व्यक्तित्व व बेहतरीन व महान कलाकार *नाना पाटेकर जी का निधन (75)* हो गया। एक बेहतरीन और वास्तविक जीवन्त और बेबाकी जीवनशैली को जीने वाले और पर्दे पर भी अपनी बेहतरीन कला को प्रदर्शित करने वाले महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि दुनियां में कला के बेहतरीन सरताज ने आज श्राद्ध पक्ष में इस दुनियां से विदाई लें ली।
नाना पाटेकर देहरादून के आरोग्यधाम अस्पताल में एक मराठी फिल्म की शूटिंग कर रहें थे तों मैं भी रोज देखने जाता था क्योंकि में उनकी फिल्में पसंद करता था। डा॰ विपुल कण्डवाल जी ने नाना से मेरा परिचय कराया तों मेंने नाना साहब से कहा कि मैं पहाड़ी मानुष टोपी और आप मराठी मानुष चलों एक छायाचित्र खिंचवा दीजिये। तों झट से तैयार हो गये।* स्मृति में रहोगे नाना आप ॐ 🙏
नाना साहब ने गरीबी से लेकर अमीरी व एक सैनिक का संघर्ष से लेकर मजदूर एवं किसान या एक डॉन की भूमिका हो या फिर आज की राजनीति के षडयंत्र वाली जीवनशैली हो या एक मजाकिया व्यक्तित्व की ही फिल्म रही हो या आज की पीढ़ी से लेकर और डिंपल कपाड़िया जेसी हीरोइनों के साथ भूमिकाएं निभाई। उन्होंने अपनी मराठी फिल्मों के प्रति रूची हो या अधेड़ जीवन में प्रेम की तलाश हो या फिर पुलिस की अच्छी बुरी भूमिका रही हो सभी में बिल्कुल जीवन्त भूमिकाएं होती थी। प्रमुख *फिल्में अंकुश , प्रहार , क्रांतिवीर , अब तक छप्पन , तिरंगा , परिन्दा , अग्निसाक्षी , वेलकम आदि विशेष* रही। उनके साक्षात्कार बहुत पसंद आते हैं।
नाना अपने क्षेत्र व संस्कृति से लेकर सामान्य जीवनशैली जीने वाले व्यक्ति थे और थियेटर से लेकर पर्दे पर जों भी रोल मिला वह उसी व्यक्तित्व में सम्पूर्ण दिखाई देते थे।
बहुत फिल्म कलाकारों का देहान्त हुआ और होता हैं लेकिन राजकपूर साहब के बाद आज नाना पाटेकर के जाने का बहुत गहरा धक्का लगा कारण एक वास्तविक संघर्षशील व्यक्तित्व और जमीनी व्यक्तित्व। जाना सभी ने हैं लेकिन छाप क्या छोड़ गये ये महत्वपूर्ण हैं।